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Wednesday, December 18, 2013
Monday, December 16, 2013
शिक्षा क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया
बाड़मेर गोस्वामी समाज के
आराध्य देव भगवान दत्तात्रेय की जयंती सोमवार
को हर्षोल्लास से मनाई। गंगागिरी मठ से संत
महात्माओं की पावन निश्रा और गोस्वामी बंधुओं
की उपस्थिति में सुबह रथ पर भगवान दत्तात्रेय
की प्रतिमा और भगवा ध्वज धारक घुड़सवार के
नेतृत्व में शोभायात्रा निकाली गई। इस अवसर पर
धर्मसभा का आयोजन हुआ जिसमें संत महात्मा और
गोस्वामी बंधुओं ने धर्म रक्षा को लेकर चर्चा की।
कार्यक्रम में चौहटन महंत जगदीशपुरी महाराज ने
धर्म रक्षा की बात करते हुए गोस्वामी समाज
को शिक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ सनातन संस्कृति और
गोस्वामी समाज का सर्वांगीण विकास करने
की बात कही। धर्म सभा में हमीरपुरा महंत
नारायणपुरी, शेरगढ़ महंत शिवगिरी, रमणिया महंत
महाबलवीर गिरी, तग भारती खुहड़ी,
सांवलपुरी गुजरात, दयालपुरी सहित गोस्वामी समाज
के पुरूषोत्तम गिरी, मदननाथ, हीर गिरी, राजपुरी,
तेज भारती, रतनपुरी व नूतनपुरी गोस्वामी ने विचार
व्यक्त किए। धर्म सभा के बाद
गोस्वामी सेवा समिति शहर अध्यक्ष पुरुषोत्तम
गिरी गोस्वामी एवं गंगागिरी मठ के कारोबारी महंत
स्वामी खुशाल गिरी महाराज ने सभी का आभार
व्यक्त किया। प्रतिभा खोज परीक्षा 29 को :
गोस्वामी समाज की ओर से प्रतिभा खोज
परीक्षा 29 दिसंबर को गांधी नगर स्थित
गोस्वामी छात्रावास में आयोजित होगी। यह
जानकारी परीक्षा संयोजक लक्ष्मणपुरी नोखडा़ ने
दी।
Thursday, October 17, 2013
kiradu temple barmer
kiradu temple barmer
यह स्थान राजस्थान के बाड़मेर से लगभग 35 किमी उत्तर-पश्चिम में है। किराडू के विश्व प्रसिद्ध पाँच मंदिरों का समूह बाड़मेर मुनाबाव रेलमार्ग पर खड़ीन स्टेशन से 5 किमी पर हथमा गांव के पास पहाड़ी के नीचे अवस्थित है। किराडू की स्थापत्य कला भारतीय नागर शैली की है। बताया जाता है कि यहाँ इस शैली के लगभग दो दर्जन क्षत विक्षत मंदिर थे लेकिन अभी ये केवल 5 हैं। यहाँ के मंदिरों में रति दृश्यों के स्पष्ट अंकन होने की वजह से किराडू को राजस्थान का खजूराहो भी कहा जाता है। सन् 1161 के एक शिलालेख के अनुसार किराडू का प्राचीन नाम किरात कूप था तथा यह किसी समय परमार राजाओं की राजधानी था। इतिहासकारों के अनुसार किरातकूप पर गुजरात के चालुक्य राजवंश के प्रतिनिधि के रूप में परमार शासकों का शासन था। बताया जाता है कि चन्द्रावती के परमार राजा कृष्णराज द्वितीय के पुत्र सच्चा राजा ने 1075 एवं 1125 ईस्वी के मध्य इस स्वतंत्र राज्य की स्थापना की। इन्हीं के वंशज सोमेश्वर ने सन् 1161 तक किराडू पर शासन किया तथा सन् 1178 तक यह महाराज पुत्र मदन ब्रह्मदेव के अधीन रहा और उसके बाद आसल ने यहाँ शासन किया था।
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