Thursday, October 17, 2013

kiradu temple barmer

 kiradu temple barmer


यह स्थान राजस्थान के बाड़मेर से लगभग 35 किमी उत्तर-पश्चिम में है। किराडू के विश्व प्रसिद्ध पाँच मंदिरों का समूह बाड़मेर मुनाबाव रेलमार्ग पर खड़ीन स्टेशन से 5 किमी पर हथमा गांव के पास पहाड़ी के नीचे अवस्थित है। किराडू की स्थापत्य कला भारतीय नागर शैली की है। बताया जाता है कि यहाँ इस शैली के लगभग दो दर्जन क्षत विक्षत मंदिर थे लेकिन अभी ये केवल 5 हैं। यहाँ के मंदिरों में रति दृश्यों के स्पष्ट अंकन होने की वजह से किराडू को राजस्थान का खजूराहो भी कहा जाता है। सन् 1161 के एक शिलालेख के अनुसार किराडू का प्राचीन नाम किरात कूप था तथा यह किसी समय परमार राजाओं की राजधानी था। इतिहासकारों के अनुसार किरातकूप पर गुजरात के चालुक्य राजवंश के प्रतिनिधि के रूप में परमार शासकों का शासन था। बताया जाता है कि चन्द्रावती के परमार राजा कृष्णराज द्वितीय के पुत्र सच्चा राजा ने 1075 एवं 1125 ईस्वी के मध्य इस स्वतंत्र राज्य की स्थापना की। इन्हीं के वंशज सोमेश्वर ने सन् 1161 तक किराडू पर शासन किया तथा सन् 1178 तक यह महाराज पुत्र मदन ब्रह्मदेव के अधीन रहा और उसके बाद आसल ने यहाँ शासन किया था।

Thursday, September 26, 2013

Barmer News

भास्कर न्यूज. बाड़मेर किताबी ज्ञान, व्यावहारिक ज्ञान के साथ ब\'चे का संस्कारित होना जरूरी है। समय साक्षी है जब भी राष्ट्र पर विपत्ति आई है। तब महाराणा प्रताप, शिवाजी और महावीर स्वामी जैसे रत्नों ने देश को बचाया है। ब\'चे के मन मस्तिष्क पर जितना माता के संस्कारों का प्रभाव पड़ता है उतना किसी और का नहीं। इसलिए माता अपने ब\'चों को भली भांति संस्कारित करने पर जोर दें। यह बात विद्या भारती द्वारा संचालित आदर्श विद्या मंदिर में आयोजित मातृ सम्मेलन को संबोधित करते हुए साध्वी प्रियरंजना ने कही। उन्होंने कहा कि जहां नारी का मान सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते हैं। सम्मेलन के मुख्य वक्ता विद्या भारती के सदस्य राधेश्याम शर्मा ने कहा कि बालक में संस्कारों का संचार करने का सशक्त माध्यम मां ही है। उसी के दिखाए मार्ग पर चल कर एक बालक जीवन में आनेवाली कठिनाइयों का डटकर सामना करता है। इस दौरान कार्यक्रम की अध्यक्षता निर्मला सिंघल, विशिष्ट अतिथि कल्पना जैन ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन सुनीता ने किया। इस दौरान तेजराज कपूरिया, हनुमानचंद बोहरा, मनोहरलाल बंसल, रिखबदास बोथरा मौजूद थे। कार्यक्रम में खरतरग\'छ जैन संघ के अध्यक्ष मांगीलाल मालू एवं खेतमल तातेड़ मौजूद थे। bhaskar.com

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बाड़मेर. अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के घटक राजस्थानी महिला परिषद का गुरुवार को गठन किया गया। संभाग उप पाटवी चंदन सिंह भाटी ने बताया की राजस्थानी भाषा की मान्यता दिलाने के लिए देश भर में चलाए जा रहे अभियान से युवा महिला शक्ति के जुडऩे से अभियान को गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि जिले में राजस्थानी भाषा की महत्ता जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से राजस्थानी महिला परिषद का गठन किया गया है। महिला परिषद का गठन समिति महासचिव उर्मिला जैन की देखरेख में किया गया। इसमें छात्रा संघ अध्यक्ष सोनू राठौड़ को संयोजक मनोनीत किया गया है। इसी तरह नेहा ददानी को जिला पाटवी, करिश्मा भाटी को महासचिव, प्रियंका शर्मा को सचिव, दिप्ती चौधरी को उपाध्यक्ष, डिंपल खोरवाल सह संयोजक, निशा तिवारी को संगठन सचिव, दीक्षा कुमारी को सह सचिव नियुक्त किया गया है। महिला परिषद का शपथ ग्रहण समारोह कन्या विद्यालय में नवरात्र में आयोजित किया जाएगा। bhaskar.com